#MeToo
What Is #MeToo ???

"MeToo" यानी कि मैं भी या मेरे साथ भी । सितंबर 2018 के बाद से  यौन उत्पीड़न का शिकार हुई महिलाएं हैशटैग #MeToo के साथ अपनी कहानियां बयां कर रही है । यहां तक कि सदियों पुरानी हुई यौन उत्पीड़न की कहानियां भी इस #MeToo के कारण सामने आ रही हैं, लेकिन दोस्तों क्या आपको पता है कि यह #MeToo है क्या और यह कब शुरू हुआ?? कैसे यह महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हो चुकी है?? क्यों यह एक आंदोलन का रूप पकड़ता जा रहा है ?? आखिर क्या है यह #MeToo ?? तो दोस्तों आज मैं आपको MeToo के बारे में पूरी जानकारियां देने जा रहा हूं । अगर आपको यह पोस्ट Useful तो इस  पोस्ट को ज्यादा ज्यादा शेयर कीजिएगा तो चलिए शुरू करते हैं,



» क्या है #MeToo ????

दोस्तों पहले अगर किसी महिला के साथ यौन उत्पीड़न होती
 थी , तो वह बदनामी के डर से या  किसी पर्सनल प्रॉब्लम्स के कारण किसी को बता नहीं पाती है, जिससे वह दरिंदा खुली हवा में चैन की सांस ले पाता था और महिलाएं दिन प्रतिदिन उस से तंग आकर सुसाइड या फिर जहर खा लिया करती थी लेकिन अपनी कहानी को बदनामी के डर से बयां नहीं कर पाती थी, लेकिन अब सोशल मीडिया का दौर आ चुका है । दोस्तों आज की दौर में अगर किसी महिला के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय होता है तो वह महिलाएं सोशल मीडिया पर हैशटैग #MeToo के साथ अपनी कहानी को बयां कर सकती है जिससे उनकी वह तकलीफ वह कहानी पूरी दुनिया के सामने आ जाती है, जिससे उस दरिंदे पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है । 



#MeToo_Kya_Hain
#MeToo





» कैसे बना ये 21वीं सदी का  आंदोलन??

दोस्तों यह महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न या शोषण के खिलाफ एक बहुत बड़ा आंदोलन है, इसमें महिलाएं सोशल मीडिया पर हैशटैग #MeToo के साथ अपनी तकलीफ, अपनी कहानी को बयान कर रही है । यह बता रही हैं कि कब उनके साथ यौन उत्पीड़न हुआ,कब से उनका शोषण हो रहा है, कौन से शख्श ने उनके साथ यह घिनौना काम किया है । 
     दोस्तों #MeToo का प्रयोग कर महिलाएं नए मामलों से लेकर पुराने से पुराने मामलों को भी सामने ला रही है   । यह बता रही हैं कि किस तरह से उनका शोषण हुआ है किस कारण से वह अपनी इस दर्द भरी कहानी को किसी से बयान नहीं कर पाई,
कभी बदनामी के डर से मुंह बंद रखा,
कभी वह डर कर चुप हो गई,
कभी कुछ समझ में नहीं आया कि क्या करना चाहिए,
        क्योंकि अब हैशटैग #MeToo के साथ अपनी कहानियों को बयां करने का एक मौका मिल चुका है इसलिए जिन महिलाओं के साथ शोषन हुआ है,और किसी कारण से वे चुप है वह महिलाएं हैशटैग #MeToo  के साथ अपनी कहानियों में नए-नए शख्स को सामने ला रही है । इस प्रकार से हैशटैग #MeToo 21वीं सदी का एक बहुत बड़ा आंदोलन का रूप लेने जा रहा है ।  



» कब हुई थी इसकी शुरुआत ???

दोस्तों #MeToo की शुरुआत 2006 में ही हो गई थी लेकिन इसका प्रचलन 2017 में आया । 16 अक्टूबर 2017 को एक अमेरिकी एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने यौन हमले के खिलाफ ध्यान आकर्षित करने के लिए उन्होंने एक ट्वीट किया जिसमें हैशटैग #MeToo का यूज किया गया था,  इसका असर यह हुआ कि दिन खत्म होते-होते #MeToo के साथ दो लाख से ज्यादा ट्वीट्स ट्वीट हो चुके थे, और 17 अक्टूबर तक पांच लाख से ज्यादा ट्वीट आ चुके थे । 
   
#MeToo
#MeToo


        फेसबुक पर 24 घंटे में पहले 47 लाख लोगों ने लगभग दो करोड़ 20 लाख  पोस्ट में #MeToo का प्रयोग किया गया था । लाखों लोगों ने हैशटैग #MeToo का प्रयोग किया जिसमें हजारों महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन हमले और उत्पीड़न की कहानियां को बयां की जिससे लगातार नए नए चेहरे  नजर आने लगे । दोस्तों इस हैशटैग में एक बहुत ही पॉपुलर और दिग्गज प्रोड्यूसर Harvey Winston  का नाम आ गया । हजारों महिलाओं ने इनके खिलाफ शिकायत दर्ज की, कि कैसे उन्होंने काम देने के बहाने इनके साथ यौन उत्पीड़न किया । 
      दोस्तों #MeToo का पहला भूचाल हॉलीवुड इंडस्ट्री में आया । धीरे-धीरे यह हैशटैग म्यूजिक, एकेडमिक, साइंस  जैसे इंडस्ट्री की और भी बढ़ता चला गया , जिसके कारण तमाम सफेदपोश  और संत की छवि  में देने वाले लोगों की असलियत सामने आने लगी । 
        लेकिन दोस्तों हो सकता है कि हैशटैग #MeToo के साथ जितने भी इल्जाम लगाए गए हैं वह झूठ भी हो या सच भी हो   । इसलिए अगर आप #MeToo का साथ देने जा रहे हैं तो आपको दोनों पक्षों की बात सुननी चाहिए हो सकता है कुछ इल्जाम गलत हो या फिर कुछ इल्जाम सही हो । 

दोस्तों इस तरह से hashtag का प्रयोग करके आप अपनी प्रॉब्लम्स को दुनिया के सामने रख सकते हैं जिससे उस शख्स पर कानूनी कार्रवाई की जा सके अगर आपको यह पोस्ट यूजफुल लगी हो तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए  | धन्यवाद  |