अगर आप  इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो निश्चित ही आपने DNS का इस्तेमाल किया हैं भले ही आप उसे महसूस नहीं किया हो की आप ने DNS का इस्तेमाल कब किया ! हो सकता है आप उसका Use कर रहे है लेकिन उसके बारे में पता नहीं हो तो चलिए जानते है DNS सिस्टम क्या हैं -  

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DNS स्‍टैंडर्ड सेट का एक Protocol हैं, जो इंटरनेट और अन्‍य प्राइवेट नेटवर्क पर डेटा का एक्‍सचेंज कैसे होगा यह तय करता हैं जिसे TCP/IP प्रोटोकॉल सूट के रूप में जाना जाता है। किसी भी वेब साइट का यूआरएल www.google.com जैसे होता हैं, लेकिन असल में इस यूआरएल के पिछे हर एक डोमेन नेम को एक IP एड्रेस Asign होता हैं।  



Domain Name Server

इसका बेसिक काम किसी भी यूजर-फ्रैंडली डोमेन नेम जैसे www.google.com का Internet Protocol (IP) एड्रेस 74.125.200.103 है और इसे नेटवर्क पर एक-दूसरे की पहचान करने के लिए कंप्यूटर द्वारा उपयोग किया जाता हैं। इंटरनेट पर कंप्यूटर और अन्य नेटवर्क Devices IP Address  उपयोग करके आपके द्वारा दि गई रिक्‍वेस्‍ट को रूट करते हैं जिससे वह वेब साइट ओपन हो सके। यह ठिक वेसा ही हैं जैसे आप अपने मोबाईल से फोन नंबर डायल कर कॉल करते हैं। लेकिन DNS कि वजह से आपको हर एक साइट का IP Address याद नहीं रखना पडता। आपको तो सिर्फ उस वेब साइट का नाम याद रखना होता हैं। तो जब आप अपने ब्राउजर में उस वेब साइट का नाम टाइप कर एंटर करते हैं, तो आप Domain Name Server जिसे DNS भी कही जाती हैं से कनेक्‍ट होते हैं जो एक विशाल डेटाबेस को मैनेज करता हैं, जिसमें हर एक डोमेन नेम को उसके आईपी एड्रेस से पॉइंट किया जाता हैं। DNS सर्वर संबंधित IP Address से डोमेन नेम को मैच करता हैं। जब आप अपने ब्राउज़र में एक डोमेन नाम टाइप करते हैं, तो आपका कंप्यूटर अपने वर्तमान DNS सर्वर से संपर्क करता है और पूछता है कि IP एड्रेस डोमेन नेम से कैसे कनेक्‍ट हुआ है। आपका कंप्यूटर तब IP एड्रेस से कनेक्‍ट होता है और आपके लिए सही वेब पेज को ओपन करता है।



What Is Domain Name ??

Domain Names वेब साइट के ऐसे एड्रेस होते हैं, जिसे हम याद रख सकते हैं और हर दिन इस्‍तेमाल करते हैं। जैसे की गूगल का डोमेन नेम google.com हैं और आपको गूगल पर जाना होता हैं, तब आप अपने वेब ब्राउज़र के एड्रेस बार में google.com एंटर करते हैं। लेकिन, आपका कंप्यूटर नहीं समझता कि “google.com” कहां है। क्‍योकी इंटरनेट और अन्‍य सभी नेटवर्क न्यूमेरिकल IP एड्रेस का इस्‍तेमाल करते हैं, जैसे की 172.217.0.142 यह IP एड्रेस google.com के लिए हैं। यदि आप यह नंबर अपने वेब ब्राउज़र के एड्रेस बार में टाइप करते है, तो आप Google की वेबसाइट पर जा सकते हैं। लेकिन हम 172.217.0.142 के बजाय google.com का उपयोग करते हैं क्योंकि Google.com जैसे एड्रेस को हम आसानी से याद रख सकते हैं।




What Is DNS In Hindi

जब भी आप किसी वेबसाइट का नाम ब्राउज़र पर सर्च करते है तो ब्राउज़र आपके द्वारा सर्च किये गए वेबसाइट के नाम पर छुपे IP Address को ISP यानी इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर जैसे आईडिया एयरटेल जियो के सर्वर तक पहुँचाता है. इसके बाद ISP ये रिक्वेस्ट गूगल के सर्वर पर पहुंचाती हैं और इस तरह गूगल आपकी वेबसाइट के IP Address को सर्च करके आपके सामने ला देता है यह प्रक्रिया बहुत तेजी से होती है इसलिए जब आप गूगल पर वेबसाइट का नाम सर्च करते है तो गूगल के सर्च रिजल्ट में वेबसाइट का होम पेज चंद सेकंड में आ जाता है.





Steps Of DNS System ??

  1. जब भी आप किसी web को access करने के लिए उसका domain name अपने browser में enter करते हो तो सबसे पहले आपका browser अपनी local cache memory में उस domain का DNS records check करता है. अगर आपने recently उस domain को access किया होगा तो local cache memory में DNS records मिल जायेगा otherwise नही.
  2. अगर DNS records आपके local cache memory में नही मिलता तो आपका browser आपके ISP’s recursive DNS servers को DNS records की request send (DNS query) करता है. ज्यादातर ऐसा होता है की Recursive DNS Servers के cache memory में DNS records मिल जाता है और records users को वापस send कर दी जाती है.
  3. यदि ISP’s recursive DNS servers पर भी DNS records नही मिलते तो वो आपके DNS records की request को Root nameservers को send करता है. Root Nameservers उस domain name में से top level domain name (our case .com) को निकाल कर उसके Top-Level Domain Name Server को send कर देता जहाँ पर सभी domain name with nameservers ip के साथ मोजूद होते है.
  4. जब आप किसी domain registrar से domain name buy करते हो तो उसी के साथ आपको Nameserver settings भी मिलती हैं जिसे आप कभी भी change कर सकते हो. Nameserver की जरिये ही ये पता चलता है की आपको DNS (Domain Name System) कौन provide कर रहा हैं.

इस तरह उस server पर जाकर आपके web का IP address मिल जाता है जिसे recursive servers पर cache memory में store कर लिया जाता है और ये सभी records एक expiration date के साथ save होते हैं जिससे की सभी records update रहें.

Last में वो IP आपके computer के browser पर send कर दिया जाता है और फिर वो उस IP के server पर connect होकर आपको web page show कर देता हैं और इस पूरी process में सिर्फ कुछ milliseconds लगते हैं.