25 December को मनाते हैं क्रिसमस,और इसे बड़ा दिन क्यों कहते हैं?

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दोस्तों दिसंबर का महीना शुरू हो चुका है , और अब कुछ ही दिनों में बच्चो का चहेता Santa Close आने वाला हैं जैसा की हर बार 25 december क्रिसमस को आता हैं ! आपलोग तो क्रिसमस को तो जरूर जानते होंगे और ये भी जानते होंगे की क्रिसमस 25 dcember को ही मनाया जाता हैं लेकिन कभी आपने ये सोचा है क्यू.....?


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शायद आपलोगों ने इसके बारे में अभी तक कुछ ध्यान ही नहीं दिया ? चलिए आज हम इसी के बारे में बात कर लेते हैं की क्रिसमस क्यों मनाया जाता हैं , 25 December को ही क्यों मनाते हैं क्रिसमस, कौन हैं सांता क्लोज और वो हमें गिफ्ट क्यों देता हैं -





हम क्रिसमस क्यों मनाते है l

कुछ लोगों का भ्रम है कि इस दिन ईशदूत ईसा मसीह का जन्मदिन पड़ता है पर सच्चाई यह है कि 25 दिसम्बर का ईसा मसीह के जन्मदिन से कोई सम्बन्ध ही नहीं है।
सायनगणना के अनुसार 22 दिसंबर को सूर्य उत्तरायण की ओर व 22 जून को दक्षिणायन की ओर गति करता है। सायनगणना ही प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर होती है। जिसके अनुसार 22 दिसंबर को सूर्य क्षितिज वृत्त में अपने दक्षिण जाने की सीमा समाप्त करके उत्तर की ओर बढ़ना आरंभ करता है। इसलिए 25 को मकर संक्रांति मनाते थे।
पूरे यूरोप के 318 पादरी उसमें सम्मिलित हुए। उसी में निर्णय हुआ कि 25 दिसम्बर मकर संक्रान्ति को सूर्य-पूजा के स्थान पर ईसा पूजा की परम्परा डाली जाये और इस बात को छिपाया जाये कि ईसा ने 17 वर्षों तक भारत में धर्म शिक्षा प्राप्त की थी। इसी के साथ ईसा मसीह के मेग्डलेन से विवाह को भी नकार देने का निर्णय इस सम्मेलन में किया गया था, बाद मे पहला क्रिसमस डे 25 दिसम्बर सन् 336 में मनाया गया।
हमारे संतों ने सदा हमें हमारी संस्कृति से परिचित कराया और आज भी हमारे हिन्दू संत हिन्दू संस्कृति की सुवास चारों दिशाओं में फैला रहे है। इसी कारण उन्हें विधर्मियों द्वारा न जाने कितना कुछ सहन भी करना पड़ा है।
मानसिक अवसाद व आत्महत्या आदि से रक्षा होती है। और मरने के बाद भी मोक्ष देनेवाली तुलसी पूजन की महता बताकर जन-मानस को भारतीय संस्कृति के इस सूक्ष्म ऋषिविज्ञान से परिचित कराया संत आसाराम बापूजी ने।
कहा जाता है कि ईसाई चाहते थे की यीशु का जन्मदिन भी इसी दिन मनाया जाए। माना जाता है कि इस त्योहार की रस्मों को ईसाई धर्म गुरुओं ने अपने धर्म से मिलाया और इसे क्रिसमस-डे नाम दिया।
बहुत सारी किताबों में लिखा है कि 25 दिसंबर को रोम के लोग रोमन उत्सव के रूप में सेलिब्रेट करते थे, इस दिन लोग एक दूसरे को ढ़ेर सारे उपहार देते थे, धीरे-धीरे ये उत्सव काफी बड़ा हो गया इसलिए इस दिन को लोग 'बड़ा दिन' कहने लगे।
दूसरी कथा के आधार पर सदियों पहले ये दिन भारत में मकर संक्रान्ति के रूप में मनाया जाता था, जो कि काफी पावन होता था इसलिए इसे 'बड़ा दिन' नाम दिया गया।
25 दिसंबर ईसामसीह के जन्म की कोई ज्ञात वास्तविक जन्म तिथि नहीं है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था, ऐसा माना जाता है,
भारत में इस दिन को रोमन यामकर संक्रांति से संबंध स्थापित करने के आधार पर चुना गया था जिसके कारण इसे 'बड़े दिन' का नाम दिया गया।
खैर कारण जो भी हो, क्रिसमस का पर्व अपने आप में खुशी, जोश और प्यार का प्रतीक है, केवल ईसाई धर्मवालों के लिए ही नहीं बल्कि हर धर्म और समुदाय के लिए ये पर्व अब खासा मायने रखता है। इसलिए आप भी जोरदार ढंग से स्वागत कीजिए इस बार के क्रिसमस का... मैरी क्रिसमस।










25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है क्रिसमस ???

मान्यताओं के मुताबिक कहा जाता है कि इस दिन ईसा मसीह का का जन्म नहीं हुआ था। चौथी शताब्दी से पहले ईसाई समुदाय इस दिन को त्योहार के रुप में नहीं मनाते थे, लेकिन चौथी शताब्दी के बाद इस दिन ईसाईयों का प्रमुख त्योहार मनाया जाने लगा।
यीशु के पैदा होने और मरने के सैकड़ों साल बाद जाकर कहीं लोगों ने 25 दिसम्बर को उनका जन्मदिन मनाना शुरू किया। लेकिन इस तारीख को यीशु का जन्म नहीं हुआ था क्यूंकि सबूत दिखाते हैं कि वह अक्टूबर में पैदा हुए थे। दिसम्बर में नहीं।
ईसाई होने का दावा करने वाले कुछ लोगों ने बाद में जाकर इस दिन को चुना था क्योंकि इस दिन रोम के गैर ईसाई लोग अजेय सूर्य का जन्मदिन मनाते थे और ईसाई चाहते थे की यीशु का जन्मदिन भी इसी दिन मनाया जाए।
(द न्यू इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका) सर्दियों के मौसम में जब सूरज की गर्मी कम हो जाती है तो गैर ईसाई इस इरादे से पूजा पाठ करते और रीति- रस्म मनाते थे कि सूरज अपनी लम्बी यात्रा से लौट आए और दोबारा उन्हें गरमी और रोशनी दे। उनका मानना था कि दिसम्बर 25 को सूरज लौटना शुरू करता है। इस त्योहार और इसकी रस्मों को ईसाई धर्म गुरुओं ने अपने धर्म से मिला लिया औऱ इसे ईसाइयों का त्योहार नाम दिया यानि (क्रिसमस-डे)। ताकि गैर ईसाईयों को अपने धर्म की तरफ खींच सके।






कौन हैं सांता क्लॉज?

बचपन में आप सबके साथ ऐसा हुआ होगा कि आपने अपनी किसी Wish को एक चिट में लिखा और तकिये के नीचे रखकर सो गये, इस उम्मीद में कि सांता क्लॉज (Santa Claus) उस विश को पूरा करेंगे. सुबह उठे तो हमारे सिरहाने एक गिफ्ट रखा होता था ये वही विश होती थी जो हम उस चिट में लिखते थे.

  1. सांता क्लॉज को सेंट निकोलस, फादर क्रिसमस (क्रिसमस के जनक), क्रिस क्रिंगल, या सिर्फ ‘सांता’ के नाम से जाना जाता है. ऐतिहासिक और मॉर्डन समय से वे बहुत सी कहानियों के लिए प्रचलित हैं.
  2. कई पश्चिमी संस्कृतियों में ऐसा माना जाता है कि सांता क्रिसमस की रात यानी 24 दिसम्बर की शाम या देर रात के समय अच्छे बच्चों के घरों में आकर उन्हें उपहार देता है.
  3. यह भी माना जाता है कि तीसरी सदी के समय तुर्की में जन्मे संत निकोलस का ही आधुनिक रूप सांता क्लॉज का है. अपने धर्मालु और दयालु स्वभाव के कारण वे लोकप्रिय हैं.
  4. उन्होंने अपनी तमाम पुश्तैनी धन-दौलत दान कर दी थी और दूर-दूर तक सफर करके वे गरीबों की मदद किया करते थे. उनकी प्रसिद्धि के साथ-साथ उनसे जुड़ी कई दिलचस्प बातें लोगों में फैलती चली गईं.
  5.  बच्चों की तरफ उनके स्नेह की कहानियां बहुत लोकप्रिय रहीं. 6 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि बड़े पैमाने पर मनाई जाने लगी. माना जाता है कि सेंट (संत) निकोलस का नाम ही बिगड़कर पहले ‘सिंतर क्लॉस’ और फिर ‘सांता क्लॉज’ हो गया.
  6. यूरोप में खूब फैलने के बाद सांता क्लॉज की प्रसिद्धि 18वीं सदी में अमेरिका तक पहुंच गई. साल 1773-74 के दौरान न्यूयॉर्क में बसे हॉलैंड मूल के परिवारों ने सामूहिक रूप से सिंतर क्लॉस की पुण्यतिथि मनाई.
  7. साल 1804 में न्यूयॉर्क हिस्टॉरिकल सोसायटी की वार्षिक सभा में उसके एक सदस्य जॉन पिंटर्ड ने संत निकोलस के लकड़ी के कटआउट बंटवाए थे.
  8. सांता का आधुनिक रूप का एक अस्तित्व 19वीं शताब्दी में सामने आया. इससे पहले वे ऐसे नहीं थे, जैसा अब दिखाए जाते हैं.
  9. संत निकोलस और जीसस के जन्म का कोई आपसी संबध नहीं है फिर भी सांता क्लॉज क्रिसमस का एक अहम हिस्सा माने जाते हैं.
  10. संत निकोलस का जन्म तीसरी सदी में जीसस की मौत के 280 साल के बाद हुआ था. निकोलस ने अपने माता-पिता को बचपन में ही खो दिया था और तभी से उनकी आस्था जीसस में बढ़ गयी थी.
  11.  सांता क्लॉज़ को रात में ही उपहार देना पसन्द है क्योंकि उन्हे उपहार देते नजर आना पसन्द नही था और अपनी पहचान किसी के सामने आए वो ऐसा नहीं चाहते थे.
  12. आज भी ऐसा कई घरों में बच्चों को बोला जाता है जल्दी सो जाओ रात में सांता आयेंगे और उपहार देकर जायेंगे.
  13. ऐसा कहा जाता है कि एक आदमी क्लेमेंट क्लार्क मूर के पास अपनी तीन बेटियों की शादी के पैसे नहीं थे. मजबूरी में उसने उन्हें बेचने की कोशिश की. उस समय संत निकोलस ने अपनी सूखती जुराबों में से सोने के सिक्कों की थैलियां उन्हें दीं. उस आदमी ने अपनी बेटियों को नहीं बेचा और संत निकोलस को ईश्वर मानने लग 
  14.  उसके बाद साल 1822 में क्लेमेंट क्लार्क मूर ने अपनी तीन बेटियों की शादी की और उसके बाद संत निकोलस के लिए एक लंबी कविता लिखी. उस कविता का शीर्षक था ‘एन अकाउंट ऑफ ए विजिट फ्रॉम सेंट निकोलस’.
  15. इसमें सेंट निकोलस को एक गोलमटोल, हंसमुख बुजुर्ग बताया गया जो क्रिसमस की रात में रेनडियर वाली गाड़ी में उड़ते हुए आते हैं और चिमनी के रास्ते घरों में प्रवेश कर घर में टंगी जुराबों में बच्चों के के लिए उपहार छोड़ जाते हैं. यह कविता जब प्रकाशित हुई तो पूरे अमेरिका में सेंट निकोलस/ सांता क्लॉज लोकप्रिय हो गए.
  16. जर्मन मूल के अमेरिकी कार्टूनिस्ट थॉमस नेस्ट ने साल 1863 के बाद से हर साल सांता की नई छवि बनाने लगे. साल 1880 तक सांता की छवि वह रूप ले चुकी थी, जिससे आज हम सब परिचित हैं.
  17. सांता क्लॉज़ क्रिसमस के कई हफ्ते पहले डिपार्टमेंट स्टोर या शॉपिंग मॉल में या पार्टियों में दिखाई देने लगता है.
  18. इस प्रथा का श्रेय जेम्स एडगर को जाता है, क्योंकि उन्होंने साल 1890 में अपने मैसाचुसेट्स डिपार्टमेंट स्टोर, ब्रोक्टोन में इस प्रथा की शुरुआत की.
  19. हंगरी में सेंट निकोलस ठीक 5 दिसम्बर को आता है और बच्चों को अगली सुबह उनके उपहार मिलते हैं. अगर वे अच्छे हैं तो उन्हें एक बैग में मिठाई मिलती है और अगर वे अच्छे नहीं हैं तो उन्हें सुनहरे रंग का बिर्च स्विच मिलता है.
  20.  ब्रिटिश, ऑस्ट्रेलियाई, आयरिश, कनाडा और अमेरिका के बच्चे सांता के रेन्डियर के लिए एक गाजर भी छोड़ते हैं, उन्हें पारंपरिक रूप से बताया जाता है कि यदि वे पुरे साल अच्छे बच्चे बन कर नहीं रहेंगे तो उनके मोज़े में उन्हें कोयले का एक टुकड़ा मिलेगा, हालांकि इस प्रथा को अब पुरानी प्रथा मन जाने लगा है.





Special Kristmas Wishesh In Hindi ??



क्रिसमस का यह प्यारा त्यौहार, जीवन में लाये खुशियाँ अपारसांता क्लॉज़ आये आपके द्वार, शुभकामना हमारी करें स्वीकारहैप्पी क्रिसमस 2019


ना कार्ड भेज रहा हूँ, ना कोई फूल भेज रहा हूँसिर्फ सच्चे दिल से मैं आपको, क्रिसमस की शुभकामनाएं भेज रहा हूँहैप्पी क्रिसमस 2019


आपकी आँखों में सजे हों जो भी सपनेदिल में छुपी हो जो भी अभिलाषाएंये क्रिसमस का पर्व उन्हें सच कर जाये, क्रिसमस पर, आपके लिए है हमारी यही शुभकानाएं!हैप्पी क्रिसमस 2019


देवदूत बनके कोई आएगा, सारी आशाएं तुम्हारी, पूरी करके जायेगे,क्रिसमस के इस शुभ दिन पर, तौफे खुशियों के दे जायेगा!हैप्पी क्रिसमस 2019





रब ऐसी क्रिसमस बार-बार लाये, क्रिसमस पार्टी में चार चाँद लग जाये,सांता क्लॉज़ से हर दिन मिलवायें, और हर दिन आप नए-नए तौफे पायें!हैप्पी क्रिसमस 2019






Conclusion

दोस्तों अब आपलोग समझ गए होंगे की क्रिसमस क्यों मनाया जाता हैं और 25 December  को ही क्यों मनाते हैं हैं क्रिसमस ?? कौन हैं सांता क्लोज ??? आशा हैं आपको इस पोस्ट में इन सारे सवालों के जवाब मिल गए होंगे! अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ साथ सोशल मीडिया जैसे Whatsapp Facebook Twitter  पर जरूर शेयर कीजियेगा ! बहोत सारे लोगों को इस पोस्ट को इंतज़ार होगा।  धन्यवाद।