स्वर्ण मंदिर हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है, और सिख धर्म का यह मुख्य देवस्थान भी है, जिसे देखकर दुनिया भर के लाखो लोग आकर्षित होते है, केवल सिख धर्म के लोग ही नही बल्कि दूसरे धर्मो के लोग भी इस मंदिर में आते है

amritsar grudwara ko mandir kyo kehte hai
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ऐसा एक सुन्दर गुरुद्वारा अमृतसर के बीच में स्थापित है, जहा आज भी दुनिया भर से लाखो श्रद्धालु आते है. इस मंदिर का मुख्य केंद्र बिंदु इसपर सोने की परत चढ़ी होना है ! आपको बता दें की स्वर्ण मंदिर एक गरुद्वारा है लेकिन फिर भी इसे मंदिर कहा जाता हैं इसका भी कुछ कारण हैं जो हम आगे जानेंगे -


अमृतसर स्वर्ण मंदिर का इतिहास

हरमंदिर साहिब और कुछ नही बल्कि भगवान का ही एक मंदिर है. गुरु अमर दास ने गुरु राम दास को एक अमृत टाँकी बनाने का आदेश दिया, ताकि सिख धर्म के लोग भी भगवान की आराधना कर सके. तभी गुरु राम दास ने सभी सिखो को अपने इस काम में शामिल कर लिया था. उनका कहना था की यह अमृत टाँकी ही भगवान का घर है. यह काम करते समय गुरु पहले जिस झोपडी में रहते थे उसे आज गुरु महल के नाम से भी जाना जाता है.


1578 CE में गुरु राम दास ने एक और टाँकी की खुदाई की, जिसे बाद में अमृतसर के नाम से जाना जाने लगा, और बाद में इसी टाँकी के नाम पर ही शहर का नाम भी अमृतसर रखा गया था. और हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) भी अमृतसर के बीचो-बीच बनाया गया था और इसी वजह से सभी सिख स्वर्ण मंदिर को ही अपना मुख्य देवस्थान मानते है.

केवल सिख धर्म गुरु ही नही बल्कि दूसरे धर्मगुरु भी सिखो के इस धर्मस्थान को मानते आये है जैसे की, बाबा फरीद और कबीर इसके साथ ही सिक्खो के पाँचवे गुरु, गुरु अर्जुन ने आदि ग्रन्थ की भी रचना वही रहते हुए की थी



इस गरुद्वारे को मंदिर क्यों कहा जाता हैं ??

श्री हरिमंदिर साहिब को दरबार साहिब के नाम से भी ख्याति हासिल है, हम इसे स्वर्ण मंदिर कहते हैं इसका यह कारण हैं की श्री हरमंदिर साहिब की नींव एक इस्लाम ने रखी थी। इतिहास के मुताबिक सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी ने लाहौर के एक सूफी संत साईं मियां मीर जी से दिसंबर, 1588 में गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी वे इस गुरूद्वारे का नाम मंदिर रखकर पूरी दुनिया को ये दिखाना चाहते थे की भारत में सभी धर्मों को एक समान माना जाता है, यहाँ हर एक धर्म के लोगो को सामान मान्यता होगी !। सिक्खों के लिए स्वर्ण मंदिर बहुत ही महत्वपूर्ण है। सिक्खों के अलावा भी बहुत से श्रद्धालु यहाँ आते हैं, जिनकी स्वर्ण मंदिर और सिक्ख धर्म में अटूट आस्था है।
एक न्यूज़ के अनुसार अंग्रेजों के आने के बाद जब पहली बार विक्टोरिया ने इस सोने से बने हुए गुरुद्वारे को देखा तो उसके मुंह से निकला गोल्डन टेंपल यानी कि सुनहरा मंदिर उसके बाद लोगों ने जो पत्रकार थे उन्हें उन्होंने इसे गोल्डन टेंपल लिखना शुरू कर दिया और कुछ लोग इसे स्वर्ण मंदिर कहने लग गए जो कि हिंदी अनुवाद है लेकिन असली नाम इसका श्री दरबार साहिब है




अमृतसर स्वर्ण मंदिर की कुछ रोचक बातें

अपनी धार्मिक महत्वता होने के बावजूद स्वर्ण मंदिर के बारे में 10 और ऐसी बाते है जिन्हें जानना आपके लिये बहोत जरुरी है –

  • श्री हरमंदिर साहिब के नाम का अर्थ “भगवान का मंदिर” है और इस मंदिर में सभी जाती-धर्म के लोग बिना किसी भेदभाव के आते है और भगवान की भक्ति करते है.
  • इस मंदिर के बारे में एक और रोचक बात यह है की आप चारो दिशाओ से इस मंदिर में प्रवेश कर सकते हो क्योकि चारो दिशाओ में इस मंदिर के प्रवेश द्वार बने हुए है. और यह लोगों की एकता को दर्शाता है.
  • अमृत सरोवर के बिच में ही स्वर्ण मंदिर को बनाया गया है, अमृत सरोवर को सबसे पवित्र सरोवर भी माना जाता है.
  • गुरूद्वारे में सिख धर्म की प्राचीन ऐतिहासिक वस्तुओ का प्रदर्शन भी किया गया है, जिसे देश-विदेश से आये करोडो श्रद्धालु देखते है.
  • संरचनात्मक रूप से यह मंदिर जमीन की सतह से ज्यादा ऊपर नही बना है और यह हिन्दू मंदिरो के बिल्कुल विरुद्ध है, क्योकि हिन्दुओ के बहोत से मंदिर जमीन से थोड़े ऊँचे बने हुए होते है.
  • इस मंदिर को बार-बार कई बार उजाड़ा गया था, पहले मुघल और अफगानों ने और फिर भारतीय आर्मी और आतंकवादियो के मनमुटाव में. और इसी वजह से इसे सिख धर्म की विजय का प्रतिक भी माना जाता है.
  • स्वर्ण मंदिर का मुख्य हॉल गुरु ग्रन्थ साहिब का घर था.
  • कहा जाता है की स्वर्ण मंदिर आज एक वैश्विक धरोहर है, जहा देश ही नही बल्कि विदेशो से भी लोग आते है और इसकी लंगर सेवा भी दुनिया की सबसे बड़ी सेवा है, यहाँ 40000 से जादा लोग रोज़ सेवा करते 


Conclusion 

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