एक वक्त था जब अपने देश में चुनाव बोझ वाली प्रक्रिया हुआ करती थी। जब वोटों की गिनती शुरू होती थी तो पता नहीं चलता था कि यह कब खत्म होगी। दो दिन, तीन दिन और कहीं-कहीं पर तो रिजल्ट आने में चार-चार दिन लग जाते थे। वोट बैलेट पर डाले जाते थे और गिनती हाथ से होती थी।

evm machine
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कई बार धांधली का आरोप भी लगता था। अगर कहीं रिकाउंटिंग का आदेश हो जाता था तो रिजल्ट कब आएगा, इस बारे में तो भविष्यवक्ता भी कुछ नहीं बना पाते थे। काउंटिंग का झंझट तो होता ही था, मतदान की प्रक्रिया भी दागदार होती थी। जब तक बैलेट पर चुनाव होते थे, बूथ कैप्चरिंग का खेल भी चलता था। दूरदराज के ग्रामीण इलाके तो दूर की बात है, शहरी क्षेत्र में भी दबंग बूथ पर कब्जा कर बैलेट पर ठप्पा मारते रहते थे। वक्त बदला, भारत की चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन यानि ईवीएम आई


अनुक्रम ------------
क्या है EVM Machine
निष्पक्ष चुनाव के लिए बनी EVM Machine
क्या है EVM का इतिहास ?
भारत में कब हुआ शुरू
EVM से होने वाले फायदे
कैसे काम करता है EVM ??
EVM की विशेषताएं
Conclusion




क्या हैं EVM Machine

EVM का Full Form होता है Electronic Voting Machine. यह एक ऐसा machine होता है जिससे की कोई मतदाता अपना मत किसी भी political party को दे सकता है. इस मशीन में अलग अलग प्रतिनिधियों के लिए separate buttons नियुक्त होते हैं जिनके ऊपर उस party का चिन्ह भी होता है. और ये सभी electronic ballot box के साथ cable के माध्यम से connected होते हैं


निष्पक्ष चुनाव के लिए बनी EVM Machine

स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव किसी भी देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए महत्‍वपूर्ण होते हैं। इसमें निष्पक्ष, सटीक तथा पारदर्शी निर्वाचन प्रक्रिया में ऐसे परिणाम शामिल हैं जिनकी पुष्टि स्वतंत्र रूप से की जा सकती है।
परम्परागत मतदान प्रणाली इन लक्ष्य में से अनेक पूरा करती है। लेकिन फर्जी मतदान तथा मतदान केन्द्र पर कब्जा जैसा दोष पूर्ण व्यवहार निर्वाची लोकतंत्र भावना के लिए गंभीर खतरे हैं। इस तरह भारत का निर्वाचन आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार का प्रयास करता रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के दो प्रतिष्ठानों भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड, बंगलौर तथा इलेक्ट्रानिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद के सहयोग से भारत निर्वाचन आयोग ने ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) की खोज तथा डिजायनिंग की।




क्या है EVM का इतिहास

पहले भारतीय ईवीएम का आविष्कार 1980 में “एम बी हनीफा” के द्वारा किया गया था जिसे उसने “इलेक्ट्रॉनिक संचालित मतगणना मशीन" के नाम से 15 अक्तूबर 1980 को पंजीकृत करवाया था| एकीकृत सर्किट का उपयोग कर “एम बी हनीफा” द्वारा बनाये गये मूल डिजाइन को तमिलनाडु के छह शहरों में आयोजित सरकारी प्रदर्शनियों में जनता के लिए प्रदर्शित किया गया था| भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 1989 में “इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड” के सहयोग से भारत में ईवीएम बनाने की शुरूआत की गई थी| ईवीएम के औद्योगिक डिजाइनर “औद्योगिक डिजाइन सेंटर, आईआईटी बॉम्बे” के संकाय सदस्य (faculty members) थे| भारत में सर्वप्रथम ईवीएम का प्रयोग 1998 में केरल के नॉर्थ पारावूर विधानसभा क्षेत्र के लिए हुए उपचुनाव में कुछ मतदान केन्द्रों पर किया गया थ


भारत में कब हुआ शुरू

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल भारत में आम चुनाव तथा राज्य विधानसभाओं के चुनाव में आंशिक रूप से 1999 में शुरू हुआ तथा 2004 से इसका पूर्ण इस्तेमाल हो रहा है। ईवीएम से पुरानी मतपत्र प्रणाली की तुलना में वोट डालने के समय में कमी आती है तथा कम समय में परिणाम घोषित करती है। ईवीएम के इस्तेमाल से जाली मतदान तथा बूथ कब्जा करने की घटनाओं में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। इसे निरक्षर लोग ईवीएम को मत पत्र प्रणाली से अधिक आसान पाते हैं। मत-पेटिकाओं की तुलना में ईवीएम को पहुंचाने तथा वापस लाने में आसानी होती है।



EVM से होने वाले फायदे

  1. 1989-90 में जब ईवीएम मशीन खरीदे गए थे तब एक मशीन की लागत 5,500 रूपए थी जो वर्तमान समय के लगभग 41,000 रूपए या 610 अमेरिकी डॉलर के समकक्ष थी| उस समय यह लागत बहुत अधिक थी लेकिन ऐसी उम्मीद थी कि भविष्य में इस निवेश के माध्यम से मतपत्र की छपाई, उसके परिवहन और भंडारण तथा इनकी गिनती के लिए कर्मचारियों को दिए जाने वाले पारिश्रमिक के रूप में खर्च होने वाले लाखों रूपए की बचत की जा सकती है|
  2. एक अनुमान के मुताबिक ईवीएम मशीन के प्रयोग के कारण भारत में एक राष्ट्रीय चुनाव में लगभग 10,000 टन मतपत्र बचाया जाता है|
  3. ईवीएम मशीनों को मतपेटियों की तुलना में आसानी से एक जगह से दूसरे जगह ले जाया जाता है, क्योंकि यह हल्का और पोर्टेबल होता है|
  4. ईवीएम मशीनों के द्वारा मतगणना तेजी से होती है| 
  5. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि निरक्षर लोगों को भी मतपत्र प्रणाली की तुलना में ईवीएम मशीन के द्वारा मतदान करने में आसानी होती है|
  6. ईवीएम मशीनों के द्वारा चूंकि एक ही बार मत डाला जा सकता है अतः फर्जी मतदान में बहुत कमी दर्ज की गई है|  
  7. मतदान होने के बाद ईवीएम मशीन की मेमोरी में स्वतः ही परिणाम स्टोर हो जाते हैं|
  8. ईवीएम का “नियंत्रण इकाई” मतदान के परिणाम को दस साल से भी अधिक समय तक अपनी मेमोरी में सुरक्षित रख सकता है| 
  9. ईवीएम मशीन में केवल मतदान और मतगणना के समय में मशीनों को सक्रिय करने के लिए केवल बैटरी की आवश्यकता होती है और जैसे ही मतदान खत्म हो जाता है तो बैटरी को बंद कर दिया जाता है|
  10. एक भारतीय ईवीएम को लगभग 15 साल तक उपयोग में लाया जा सकता है|



कैसे काम करता है EVM

EVM को दो यूनिट के साथ बनाया गया है: कंट्रोल यूनिट और बैलट यूनिट। इन यूनिट को एक साथ एक केबल द्वारा जोड़ा जाता है। EVM का कंट्रोल यूनिट, प्रेसिडिंग ऑफिसर या मतदान अधिकारी के पास रखा जाता है। मतदाताओं को वोट डालने के लिए बैलेटिंग यूनिट को एक मतदान कक्ष के भीतर रखा जाता है। यह इस बात को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि मतदान अधिकारी आपकी पहचान की पुष्टि कर सके। EVM के साथ, मतदान पत्र जारी करने के बजाय, मतदान अधिकारी बैलेट बटन को दबाता हैं, जिसके बाद मतदाता अपना वोट डालने में सक्षम बनता है।
इस मशीन पर उम्मीदवारों के नाम और या प्रतीकों की एक लिस्‍ट उपलब्ध होती हैं, जिसके बगल में नीले रंग का बटन होता हैं। मतदाता उम्मीदवार के नाम के आगे का बटन दबा सकते हैं, जिसे वे वोट देना चाहते हैं।
देश में बिजली की भारी समस्याओं को दूर करने के लिए भी यह मशीन तैयार की गई है। निर्बाध मतदान सुनिश्चित करने के लिए, मशीनें 6V एल्कलाइन बैटरियों पर चलती हैं, जिनका निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बैंगलोर और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद द्वारा किया जाता है। यह मशीनों को बिजली की आपूर्ति के बिना स्वतंत्र रूप से चलाने में सक्षम बनाता है और बिजली के झटके की संभावना को भी खत्म करता है।
एक बैलेटिंग यूनिट में ज्यादा से ज्यादा 16 उम्मीदवारों हो सकते है। तो ऐसी चार बैलेटिंग यूनिट एक साथ लिंक कर इसे 64 उम्मीदवारों की लिस्‍ट को संभालने के लिए बनाया जा सकता हैं


EVM की विशेषताएं

यह छेड़छाड़ मुक्त तथा संचालन में सरल है
नियंत्रण इकाई के कामों को नियंत्रित करने वाले प्रोग्राम "एक बार प्रोग्राम बनाने योग्य आधार पर"माइक्रोचिप में नष्ट कर दिया जाता है। नष्ट होने के बाद इसे पढ़ा नहीं जा सकता, इसकी कॉपी नहीं हो सकती या कोई बदलाव नहीं हो सकता।
ईवीएम मशीनें अवैध मतों की संभावना कम करती हैं, गणना प्रक्रिया तेज बनाती हैं तथा मुद्रण लागत घटाती हैं।
ईवीएम मशीन का इस्तेमाल बिना बिजली के भी किया जा सकता है क्योंकि मशीन बैट्री से चलती है।
यदि उम्मीदवारों की संख्या 64 से अधिक नहीं होती तो ईवीएम के इस्तेमाल से चुनाव कराये जा सकते हैं।
एक ईवीएम मशीन अधिकतम 3840 वोट दर्ज कर सकती है


Conclusion

तो दोस्तों ! अब आप लोग जान गए होंगे की " Electronic Voating Machine क्या हैं और कैसे काम करता हैं " अगर आपको ये पोस्ट थोड़ी भी यूजफुल लगी हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ! धन्यवाद
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